क्यूँ नहीं मिलता मुझे चाँद ,मै चाँद चाहती हूँ
उन हजारों दियो की रौशनी चाहती हूँ
क्यूँ नहीं मिलता मुझे चाँद मै चाँद चाहती हूँ
चारों तरफ अँधेरा है घना और घना
उन कोहरों से हिसाब चाहती हूँ
क्यूँ नहीं मिलता मुझे चाँद मै चाँद चाहती हूँ
Monday, January 25, 2010
mera parichay
मै भी एक आम इंसान की तरह ही हूँ ,एक भारतीय नारी जिसकी सारी दुनिया उसके परिवार के सुख दुःख मै निहित है /आज सोचा कुछ आपने को भी निखारना चाहिए और मैंने अपना ब्लॉग लिखने का मनं बना लिया ,अपने सुख दुःख सब लिखना चाहती हूँ ,
मै शादी के पहले कविता लिखा करती थी ,अब मै अपने husband के कहने पर वापस वह प्रयास karungi
मै शादी के पहले कविता लिखा करती थी ,अब मै अपने husband के कहने पर वापस वह प्रयास karungi
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