क्यूँ नहीं मिलता मुझे चाँद ,मै चाँद चाहती हूँ
उन हजारों दियो की रौशनी चाहती हूँ
क्यूँ नहीं मिलता मुझे चाँद मै चाँद चाहती हूँ
चारों तरफ अँधेरा है घना और घना
उन कोहरों से हिसाब चाहती हूँ
क्यूँ नहीं मिलता मुझे चाँद मै चाँद चाहती हूँ
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